भविष्य की पीढ़ियों को सही इतिहास बताएं और सिखाएं। अब तक हमें झूठे अभिनेताओं, लेखकों, विधर्मियों के साथ नकली इतिहास पढ़ाया जाता था। 16 साल की #मुलराजा सोलंकी ने #मुहम्मद गौरी को इतनी बुरी तरह हराया कि उसकी सेना के अधिकांश लोग हिंदू धर्म में परिवर्तित हो गए।
गुजरात के #चालुक्य ही सोलंकी कहे जाते हैं। मोहम्मद गोरी के समय अन्हिल पट्टन पर अल्पव्यस्क मूलराज नामक शासक का शासन था। मूलराज की माता रानी नायका अपने अल्पवयस्क पुत्र की संरक्षिका के रूप में यहां शासन कर रही थी। रानी #नायका बहुत ही कुशल नीतिनिपुण और कूटनीतिज्ञा थीं। उन्हें नारी समझकर ही गौरी ने अन्हिलवाड़ा पर 1175 ई. में आक्रमण कर दिया।
रानी के समक्ष अपने स्वर्गीय राजा के पश्चात परीक्षा की विकट घड़ी आ उपस्थित हुई। वह अपने पति, अपनी प्रजा और अपने देश के प्रति अपने कर्तव्य भाव से भर उठी। रानी विदेशी आततायी आक्रांता को धूल चटाने की योजना बनाने लगी। उस समय गुजरात का प्रमुख सोलंकी भीमदेव था। उसने रानी नायका की सहायता के लिए अपनी सेवाएं दीं और स्वयं ही नहीं अपितु कई राजाओं को लेकर वह विदेशी शासक के विरूद्घ युद्घ के मैदान में आ डटा। इतना ही नहीं रानी नायका ने भी अपनी एक अनोखी योजना पर कार्य किया। वह अपनी पीठ पर अपने अल्पवयस्क राजकुमार को बांधकर लायी और युद्घ के मैदान में चण्डी बनकर कूद पड़ी। इस घटना का उल्लेख वीर सावरकर जी ने अपनी पुस्तक ‘भारतीय इतिहास के छह स्वर्णिम पृष्ठ’ में इस प्रकार किया है:-
‘गुजरात के मुख्य राजा की मृत्यु हो जाने से वहां की रानी और सैनिक अधिकारियों ने मृत राजा के बहुत ही छोटे बच्चे को उस राज्य पर बिठा दिया था। इसलिए मोहम्मद को वह राज्य दुर्बल दिखाई पड़ा और उसने उस पर चढ़ाई कर दी। किंतु आपातत: दीखने वाली इस दुर्बल परिस्थिति ने मोहम्मद के छक्के छुड़ा दिये। मोहम्मद की चढ़ाई होते देख गुजरात की हिंदू सेना स्वयं आगे बढ़कर आबू पहाड़ के आस-पास तक आ धमकी। कहना न होगा कि उनसे सहानुभूति रखने वाले कुछ हिंदू राजाओं ने भी उसे इस पहल में पूरी सहायता की। रानी ने वहां बड़ी शूरता के साथ सामना किया। वह अपने लाडले नन्हे राजा को हिंदू सेना के सामने ले आयी और इन शब्दों में उन सबका आह्वान किया कि यह बाल राजा आप लोगों की गोद में डाल रही हूं। प्राणपण से इसकी रक्षा कीजिए। तत्काल आग भड़क उठी और वह सारी हिंदू सेना और आस-पास के सहायक हिंदू नरेश भी मोहम्मद के साथ इतने आवेश से लड़े कि मार से मात खाकर उसकी सारी सेना दशों दिशाओं में भाग निकली। बड़े कष्ट से मोहम्मद गोरी प्राण बचाकर जो भागा तो अपने अधीन सीमा प्रदेश में ही जाकर रुका।’
रानी को दो सम्मान
गजनवी के पश्चात मोहम्मद गोरी का गुणगान करना वर्तमान भारतीय इतिहास का एक बहुत बड़ा छल है। उस छल को देखकर तो ऐसा लगता है कि जैसे बीच के काल में #भारत मर ही गया था। गोरी जैसे क्रूर शासकों के क्रूर कृत्यों का वंदन इस प्रकार किया गया है कि जैसे वह बहुत बड़ा महात्मा हो। इस पर पी.एन. ओक लिखते हैं-
‘क्या भारत में पवित्र उपदेशों का अकाल और अभाव था? क्या भारत के पास कृष्ण की #गीता, शंकराचार्य का एकेश्वरवाद वेद और #उपनिषद नहीं था?’
✍️ राकेश कुमार आर्य